शिर्डी के साँई बाबा जी की समाधी और बूटी वाड़ा मंदिर में दर्शनों एंव आरतियों का समय....

"ॐ श्री साँई राम जी
समाधी मंदिर के रोज़ाना के कार्यक्रम

मंदिर के कपाट खुलने का समय प्रात: 4:00 बजे

कांकड़ आरती प्रात: 4:30 बजे

मंगल स्नान प्रात: 5:00 बजे
छोटी आरती प्रात: 5:40 बजे

दर्शन प्रारम्भ प्रात: 6:00 बजे
अभिषेक प्रात: 9:00 बजे
मध्यान आरती दोपहर: 12:00 बजे
धूप आरती साँयकाल: 5:45 बजे
शेज आरती रात्री काल: 10:30 बजे

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निर्देशित आरतियों के समय से आधा घंटा पह्ले से ले कर आधा घंटा बाद तक दर्शनों की कतारे रोक ली जाती है। यदि आप दर्शनों के लिये जा रहे है तो इन समयों को ध्यान में रखें।

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Friday 26 April 2024

ऐसी लागी लगन, मीरा हो गई मगन

ऐसी लागी लगन, मीरा हो गई मगन

हीरे मोंती से नही शोभा है हाथ की,
है हाथ जो भगवान् का पूजन किया करे,
मर कर भी अमर है नाम उस जिव का जग मैं,
प्रभु प्रेम में बलिदान जो जीवन किया करे ...!
ऐसी लागी लगन, मीरा हो गई मगन
वो तो गली-गली हरी गुन गाने लगी
महलो में पली, बन के जोगिन चली
मीरा रानी दीवानी कहाने लगी ...!
ऐसी लागी लगन, मीरा हो गई मगन
ऐसी लागी लगन, मीरा हो गई मगन ...

कोई रोके नही, कोई टोके नही
मीरा गोविंदा गोपाल गाने लगी
बैठी संतों के संग, रंगी मोहन के रंग
मीरा प्रेमी प्रीतम को मनाने लगी ...!
ऐसी लागी लगन, मीरा हो गई मगन
वो तो गली-गली हरी गुना गाने लगी
महलो में पली, बन के जोगिन चली
मीरा रानी दीवानी कहाने लगी
ऐसी लागी लगन, मीरा हो गई मगन
ऐसी लागी लगन, मीरा हो गई मगन ...

राणा ने विष दिया, मानो अमृत पिया
मीरा सागर में सरिता समाने लगी
दुःख-ऐ लाखों सहे, मुक्से गोविन्द कहे
मीरा गोविंदा गोपाल-ऐ गाने लगी ...!
ऐसी लागी लगन, मीरा हो गई मगन
वो तो गली-गली हरी गुण गाने लगी
महलो में पली, बन के जोगिन चली
मीरा रानी दीवानी कहने लगी ...!
ऐसी लागी लगन, मीरा हो गई मगन
ऐसी लागी लगन, मीरा हो गई मगन !!!

Thursday 25 April 2024

माँ-बाप को भूलना नहीं|

माँ-बाप को भूलना नहीं|


भूलो सभी को मगर, माँ-बाप को भूलना नहीं।
उपकार अगणित हैं उनके, इस बात को भूलना नहीं।।
पत्थर पूजे कई तुम्हारे, जन्म के खातिर अरे।
पत्थर बन माँ-बाप का, दिल कभी कुचलना नहीं।।
मुख का निवाला दे अरे, जिनने तुम्हें बड़ा किया।
अमृत पिलाया तुमको जहर, उनको उगलना नहीं।।
कितने लड़ाए लाड़ सब, अरमान भी पूरे किये।
पूरे करो अरमान उनके, बात यह भूलना नहीं।।
लाखों कमाते हो भले, माँ-बाप से ज्यादा नहीं।
सेवा बिना सब राख है, मद में कभी फूलना नहीं।।
सन्तान से सेवा चाहो, सन्तान बन सेवा करो।
जैसी करनी वैसी भरनी, न्याय यह भूलना नहीं।।
सोकर स्वयं गीले में, सुलाया तुम्हें सूखी जगह।
माँ की अमीमय आँखों को, भूलकर कभी भिगोना नहीं।।
जिसने बिछाये फूल थे, हर दम तुम्हारी राहों में।
उस राहबर के राह के, कंटक कभी बनना नहीं।।
धन तो मिल जायेगा मगर, माँ-बाप क्या मिल पायेंगे?

Wednesday 24 April 2024

पानी तो अनमोल है....

पानी तो अनमोल है,

Save Water, Save Life....

पानी तो अनमोल है
उसको बचा के रखिये
बर्बाद मत कीजिये इसे
जीने का सलीका सीखिए
पानी को तरसते हैं
धरती पे काफी लोग यहाँ
पानी ही तो दौलत है
पानी सा धन भला कहां
पानी की है मात्रा सीमित
पीने का पानी और सीमित
तो पानी को बचाइए
इसी में है समृधी निहित
शेविंग या कार की धुलाई
या जब करते हो स्नान
पानी की जरूर बचत करें
पानी से है धरती महान
जल ही तो जीवन है
पानी है गुनों की खान
पानी ही तो सब कुछ है
पानी है धरती की शान
पर्यावरण को न बचाया गया
तो वो दिन जल्दी ही आएगा
जब धरती पे हर इंसान
बस 'पानी पानी' चिल्लाएगा
रुपये पैसे धन दौलत
कुछ भी काम न आएगा
यदि इंसान इसी तरह
धरती को नोच के खाएगा
आने वाली पुश्तों का
कुछ तो हम करें ख़्याल
पानी के बगैर भविष्य
भला कैसे होगा खुशहाल
बच्चे, बूढे और जवान
पानी बचाएँ बने महान
अब तो जाग जाओ इंसान
पानी में बसते हैं प्राण ॥

Tuesday 23 April 2024

मनुष्य के तीन मूल्य...

मनुष्य के तीन मूल्य... 

एक खिलौने वाला तीन बहुत ही सुंदर और आकर्षक गुड़िया बनाकर राजा के पास बेचने के लिए गया। तीनों गुड़िया देखने में एक ही जैसी थी, कोई अन्तर मालूम नही चलता था, पर उनके दाम अलग-अलग थे।

खिलौने वाले राजा से कहा, एक के दाम एक सौ, दूसरे के चार सौ, और तीसरे के पूरे पन्द्रह सौ। राजा सोच में पड़ गया कि आख़िर तीनों गुडिया तों देखने में एक ही जैसी है तों फिर दाम अलग-अलग क्यों?  राजा ने उस खिलौने वाले से कहा की तुम अभी इन सबको यही छोड़कर जाओ, पैसे तुम्हें कल मिलेगे। वह जब चला गया तों राजा इसकी चर्चा अपने मंत्रियों से की,  पर यह बात किसी के समझ में नही आ रही थी। पर उसके मंत्रिपरिषद में एक मंत्री बहुत ही समझदार था। उसने राजा से उन गुड़ियो को अपने घर ले जाने की ईजाजत मांगी, और कहा की कल वो इस रहस्य को सबके सामने सुलझा देगा। राजा ने उसे गुडियों को घर ले जाने की अनुमति दे दी।

मंत्री के घर पर उसकी पत्नी और बेटी थी, दोनों ही इतने गुणी और समझदार थीं की उन के चर्चे शहर में भी होते रहते थे ।

तीनो मिलकर रातभर उन गुडियों को जांचते और परखते रहे और आखिरकार उन लोगों ने रहस्य का पता लगा ही लिया, सुबह मंत्री राजा के पास पहुँचा और उसने राजा को बताया कि उसने वो रहस्य खोज लिया है,  तों राजा ने मंत्रिमंडल की बैठक बुलाई और सबके सामने उसे बताने को कहा।

मंत्री ने कहा, "पहली वाली गुड़िया (सौ वाली ) के एक कान में जब कोई सीक डालो तों वह सीधे दूसरे कान से निकल जाती थी, दूसरी वाली (चार सौ ) के कान में जब कोई सीक डालो तों वह कान से न निकल कर मुख से निकल जाती थी, और जब तीसरी वाली (पन्द्रह सौ) के कान में जब कोई सीक डाली जाती थी तों वह न मुख से निकलती थी और न ही कान से बल्कि वह उसके पेट में जा कर अटक जाती थी।"

मंत्री ने राजा से कहा, जो मनुष्य सहनशील एवं गंभीर होते है, वह मनुष्य मूल्यवान होता है,  जो एक कान से सुने और मुख से तुरंत प्रचारित करने लगे वह उससे कम दर्जे का होता है, पर वह व्यक्ति जो किसी भी बात को एक कान से सुनकर हमेशा दूसरे कान से निकल देता है वह बहुत ही घटिया इन्सान होता है,  ऐसे लोगो का मूल्य अधिक नही होता। अब राजा को सारी बात समझ में आ गयी थी। उसने खुश होकर मंत्री को पुरस्कार भी दिया।

गौरतलब : कोई भी बात सुनकर अपने भीतर ही सीमित रखना समझदारी है, किसी बात को हँसी में उड़ा देने वाले लोग या चुगली करने वाले लोगों की समाज में क़द्र नही होता।

Monday 22 April 2024

हर एक की कहीं न कहीं उपयोगिता है।

हर एक की कहीं न कहीं उपयोगिता है।


एक राजा था। उसने आज्ञा दी कि संसार में इस बात की खोज की जाय कि कौन से जीव-जंतु निरुपयोगी हैं। बहुत दिनों तक खोज बीन करने के बाद उसे जानकारी मिली कि संसार में दो जीव जंगली मक्खी और मकड़ी बिल्कुल बेकार हैं। राजा ने सोचा, क्यों न जंगली मक्खियों और मकड़ियों को ख़त्म कर दिया जाए।

इसी बीच उस राजा पर एक अन्य शक्तिशाली राजा ने आक्रमण कर दिया, जिसमें राजा हार गया और जान बचाने के लिए राजपाट छोड़ कर जंगल में चला गया। शत्रु के सैनिक उसका पीछा करने लगे। काफ़ी दौड़-भाग के बाद राजा ने अपनी जान बचाई और थक कर एक पेड़ के नीचे सो गया। तभी एक जंगली मक्खी ने उसकी नाक पर डंक मारा जिससे राजा की नींद खुल गई। उसे ख़याल आया कि खुले में ऐसे सोना सुरक्षित नहीं और वह एक गुफ़ा में जा छिपा। राजा के गुफ़ा में जाने के बाद मकड़ियों ने गुफ़ा के द्वार पर जाला बुन दिया।

शत्रु के सैनिक उसे ढूँढ ही रहे थे। जब वे गुफ़ा के पास पहुँचे तो द्वार पर घना जाला देख कर आपस में कहने लगे, "अरे! चलो आगे। इस गुफ़ा में वह आया होता तो द्वार पर बना यह जाला क्या नष्ट न हो जाता।"

गुफ़ा में छिपा बैठा राजा ये बातें सुन रहा था। शत्रु के सैनिक आगे निकल गए। उस समय राजा की समझ में यह बात आई कि संसार में कोई भी प्राणी या चीज़ बेकार नहीं। अगर जंगली मक्खी और मकड़ी न होतीं तो उसकी जान न बच पाती। 


इस संसार में कोई भी चीज़ या प्राणी बेकार नहीं। हर एक की कहीं न कहीं उपयोगिता है।

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बाबा के 11 वचन

ॐ साईं राम

1. जो शिरडी में आएगा, आपद दूर भगाएगा
2. चढ़े समाधी की सीढी पर, पैर तले दुःख की पीढ़ी कर
3. त्याग शरीर चला जाऊंगा, भक्त हेतु दौडा आऊंगा
4. मन में रखना द्रढ विश्वास, करे समाधी पूरी आस
5. मुझे सदा ही जीवत जानो, अनुभव करो सत्य पहचानो
6. मेरी शरण आ खाली जाए, हो कोई तो मुझे बताए
7. जैसा भाव रहे जिस जन का, वैसा रूप हुआ मेरे मनका
8. भार तुम्हारा मुझ पर होगा, वचन न मेरा झूठा होगा
9. आ सहायता लो भरपूर, जो माँगा वो नही है दूर
10. मुझ में लीन वचन मन काया, उसका ऋण न कभी चुकाया
11. धन्य-धन्य व भक्त अनन्य, मेरी शरण तज जिसे न अन्य

.....श्री सच्चिदानंद सदगुरू साईनाथ महाराज की जय.....

गायत्री मंत्र

ॐ भूर्भुवः॒ स्वः॒
तत्स॑वितुर्वरे॑ण्यम्
भ॒र्गो॑ दे॒वस्य॑ धीमहि।
धियो॒ यो नः॑ प्रचो॒दया॑त्॥

Word Meaning of the Gayatri Mantra

ॐ Aum = Brahma ;
भूर् bhoor = the earth;
भुवः bhuwah = bhuvarloka, the air (vaayu-maNdal)
स्वः swaha = svarga, heaven;
तत् tat = that ;
सवितुर् savitur = Sun, God;
वरेण्यम् varenyam = adopt(able), follow;
भर्गो bhargo = energy (sin destroying power);
देवस्य devasya = of the deity;
धीमहि dheemahi = meditate or imbibe

these first nine words describe the glory of Goddheemahi = may imbibe ; pertains to meditation

धियो dhiyo = mind, the intellect;
यो yo = Who (God);
नः nah = our ;
प्रचोदयात prachodayat = inspire, awaken!"

dhiyo yo naha prachodayat" is a prayer to God


भू:, भुव: और स्व: के उस वरण करने योग्य (सूर्य) देवता,,, की (बुराईयों का नाश करने वाली) शक्तियों (देवता की) का ध्यान करें (करते हैं),,, वह (जो) हमारी बुद्धि को प्रेरित/जाग्रत करे (करेगा/करता है)।


Simply :

तीनों लोकों के उस वरण करने योग्य देवता की शक्तियों का ध्यान करते हैं, वह हमारी बुद्धि को प्रेरित करे।


The God (Sun) of the Earth, Atmosphere and Space, who is to be followed, we meditate on his power, (may) He inspire(s) our intellect.